January 12, 2022

Fundamentals of Investing in Stock Market India 2022 | शेयर बाजार में निवेश की मूल बातें

Fundamentals of Investing in Stock Market India 2022 |शेयर बाजार में निवेश की मूल बातें

 When to Start Investing in Stock Market |           शेयर बाजार में इनवेस्ट कब शुरू करे ?

  • जब हम कमाना शुरू करते है ,तो पहले लोग वेतन ( Salary)  के पैसे में से निवेश करना या खरीददारी करना पसंद करते है , लेकिन एक सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक ज़रूरत को किनारे कर दिया जाता है जो है बीमा
  • एक बीमा पॉलिसी एक लंबी अवधि का निवेश होती है, जो आपके परिवार को सुरक्षा देने का एक प्रमुख साधन होती है।  जिंदगी अनिश्चित होती है और बीमा पॉलिसी का होना आपके परिवार को एक तरह का आर्थिक सहारा होता है।
  • टर्म इंश्योरेंस ( Term Life Insurance Plan )  और हेल्थ इन्शुरन्स ( Health Insurance Policy ) होना बहोत जरुरी है |
  • पावर ऑफ कंपाउंडिंग का लाभ उठाने के लिए आपको नियमित रूप से  निवेश करना चाहिए|

 

What is Financial Portfolio & Stock Market Portfolio 

फाइनेंसियल पोर्टफोलियो और शेयर बाजार पोर्टफोलियो क्या है |

 

  • financial portfolio is collection or selection of  investment securities like bonds, stocks, mutual funds, pension plans, real estate and even physical assets such as gold .
  • Stock Market Portfolio – Collection or selection of stocks,bonds from different sectors which are not  directly related to each other .

portfolio Management is Selecting the right set of assets  आपके निवेश के नुकसान को कम करने और आपके रिटर्न को अधिकतम करने के लिए  Ensure a well-diversified portfolio across all asset classes.

Types of  Portfolio – पोर्टफोलियो निवेश के प्रकार

  • The Aggressive Portfolio -Portfolio that takes a greater risk for  high returns.
  • The Defensive Portfolio– In defensive portfolio, the aim is to bring down the risk of losing the principal,low-risk low profit portfolio.
  • The Income Portfolio -In income portfolio goal is to Making money or Generating a positive cash flow like  dividends from stocks .
  • The Hybrid Portfolio-Diversification in stocks and high-grade corporate or government bonds in relatively fixed proportions.

Factors To Consider When Creating a Portfolio

(पोर्टफोलियो बनाते समय ध्यान देने योग्य बातें) 

 

  • Diversification – विविधीकरण करना
  • Regular Investment – नियमित निवेश
  • Follow up and rearrange if require -जानकारी लेना और पुनर्निर्माण करना
  • Proper research –
  • Risk & Reward  Analysis – जोखिम और लाभ विश्लेषण

 

What Factors to consider When select Stock for investing ?                        इनवेस्ट करने के लिए शेयर कैसे चुने 

 

Market capitalization (Market Value of company ) – कंपनी का बाजार मूल्य

शेयर का वर्तमान बाजार मूल्य (500 rs ) x शेयरों की कुल संख्या (50000000 nos.) = मार्केट कैपिटलाइजेशन (2500 crore)

 

Market capitalization (Market Value of company ) – कंपनी का बाजार मूल्य

 

 What is Share Holding Pattern ? शेयर होल्डिंग पैटर्न क्या होता है ?

शेयरहोल्डिंग पैटर्न पेज प्रमोटर की होल्डिंग, FII (Foreign Institutions)  की होल्डिंग, DII (Domestic Institutional Investors)  की होल्डिंग और आम जनता (General Public)  द्वारा शेयर होल्डिंग आदि को प्रस्तुत करता है।

प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप- Promoter’s holding – सेबी के अनुसार प्रमोटर की अधिकतम होल्डिंग कुल शेयरों के 75% से अधिक नहीं होनी चाहिए | प्रमोटर की हिस्सेदारी कंपनी के विश्वास और विश्वसनीयता का एक महत्वपूर्ण संकेतक है|उच्च हिस्सेदारी सकारात्मकता का संकेत देती है, कम प्रमोटर हिस्सेदारी कम आत्मविश्वास का संकेत देती है|

  • Promoter & Promoter Group
  • Public
  • Foreign Institutions (FII)
  • Mutual Funds (DII)
  • Central Govt

3.EPS (Earning Per Share) प्रति शेयर कमाई

Trailing EPS – Last Financial year end Earning .

Current EPS – Current year Earning .

Forward EPS – Earning Estimate for future year .

यदि आपके पास कंपनी के 100शेयर्स है तो आपका EPS 1000 rs.होता है | लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि कंपनी शेयर धारक को सभी भुगतान करेगी, कंपनी के विकास के लिए और कुछ शेयर धारक को dividend के रूप में दे सकती है ,अगर कंपनी विकास के लिए उपयोग करती है तो शेयर की कीमत  बढ़ सकती है |

 

P/E Ratio – Price /Earnings Ratio

P/E Ratio को तुलना करने के लिए उपयोग किया जाता है , उसी सेक्टर के दूसरे कंपनी से या फिर या उसी कंपनी के सेक्टर से ,अगर P/E Ratio कम हे तो उसका आप लाभ उठा सकते हैं।

किसी भी कंपनी का P/E Ratio यह पहचानने में मदद करता है कि उसके साथि कंपनी से कितनी सस्ती या महंगी है।अगर उसी सेक्टर के दूसरे कंपनी का P/E Ratio इस Company  ज्यादा है तो हमे ये कंपनी के शेयर और बढ़ने की उम्मीद है, इसी तरह हम सेक्टर से भी तुलना कर सकते है,इस कंपनी का P/E Ratio इन्डस्ट्री के P/E Ratio से कम है तो ये पॉजिटिव संकेत मन जाता है

 

EBITDA stands for “Earnings before interest, taxes, depreciation and amortization .

EBITDA tells the investor, the profit that the company is making from its operations. If the EBITDA is negative, then it is a very negative sign because it means that the company is losing money in its core prosperity.

Cash Flow-कॅश फ्लो

कैश फ्लो एक निश्चित अवधि, जैसे एक financial year में व्यवसाय में आने या बाहर जाने वाली राशि है। यह यह निर्धारित करने में मदद करता है कि कंपनी के पास कितनी liquidity है। यदि कोई कंपनी “Cash flow सकारात्मक” है, तो इसका मतलब है कि वह व्यवसाय से अधिक नकदी पैदा कर रही है, जितना वह भुगतान कर रही है। यह एक सकारात्मक संकेत है क्योंकि इसका मतलब है कि कंपनी के पास सौदेबाजी की शक्ति(bargaining power) है। यह अपने ग्राहकों को बेच रहा है और जल्दी payment प्राप्त कर रहा है जबकि यह आपूर्तिकर्ताओं से खरीद रहा है और उन्हें देर से भुगतान कर रहा है। यदि कोई कंपनी “नकदी प्रवाह नकारात्मक” है, तो यह एक खतरनाक संकेत है क्योंकि इसका मतलब है कि कंपनी के पास कोई तरलता नहीं है और वह अपने suppliers and creditors पर पूरी तरह निर्भर है।

Return on Equity (ROE) – लाभांश

ROE or Return on Equity indicates how efficiently the management is able to get a return from the shareholders’ equity. ROE is calculated with the following method: Net Income / Shareholders’ Equity, For Example: Suppose a company earned Rs. 1,000 in profit and the total equity capital is Rs. Rs. 2000. The ROE is 1000/2000 = 50%. Suppose another company in the same sector/ industry earned a ROE of 30%. You know which company is a more efficient utilize of capital. A variation of the same concept is the Return on Net worth of RONW in which we take in not only the equity capital but also the retained earnings (reserves). Example: Hawkins Cooker’s Net Worth (equity + reserves) as of 31.3.2012 was Rs. 51.59 crores while its net profit was Rs. 30.08 crores. The Return on Net Worth is 58%.

Debt Equity Ratio

Debt Equity Ratio is the proportion of debt to equity used to run the company’s operations. It is calculated with the following method:

Total liabilities / equity share capital + reserves

When examining the health of your business, it’s critical to take a long, hard look at company’s debt-to-equity ratio. If Debt Equity ratios are increasing, meaning there’s more debt in relation to equity, Company is being financed by creditors rather than by internal positive cash flow, which may be a dangerous trend. The debt/equity ratio also depends on the industry in which the company operates. For example, capital-intensive industries such as capital goods, auto manufacturing tend to have a debt/equity ratio above 2, while IT companies / Consumer Goods companies with high brand equity have a debt/equity of under 0.5. Example: Hawkins Cooker’s equity + reserves as of 31.3.2012 were Rs. 51.6 crores while its debt was Rs. 12.22 crores. The debt equity ratio is 0.24.

Dividend Yield- डिविडेंड यील्ड

  • डिविडेंड यील्ड ‘एक फिनांशल रेश्यो है जो दर्शाता है कि कंपनी अपने शेयर की कीमत के सापेक्ष प्रत्येक वर्ष लाभांश में कितना भुगतान करती है|

Support and Resistance

  • सपोर्ट रेजिस्टेंस को डिमांड और सप्लाई झोन भी कहते है , इसका उपयोग इन्वेस्टिंग और ट्रेडिंग में भी होता है |
  • जैसे आम मार्किट में कोई चीज की डिमांड या मांग ज्यादा होती है , और सप्लाई मतलब बेचने वाले कम है तो उस चीज का भाव बढ़ता है |
  • स्टॉक मार्किट में भी होता है , मगर इसे पहचानने के लिए अभ्यास की जरुरत होती है , जैसे जैसे आपको अनुभव आएगा वैसे आप सही डिमांड और सप्लाई झोन को पहचानकर सही तरीके से इन्वेस्टिंग और ट्रेडिंग भी कर सकते है
  • Support & resistance को आगे हम विस्तार से देखेंगे  |

 

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