April 17, 2022

Secret of Finding Trend with Option Chain Analysis in Hindi | ऑप्शन चैन एनालिसिस सीखे

Secret of Finding Trend with Option Chain Analysis in Hindi | ऑप्शन चैन एनालिसिस सीखे

Defination of Option Chain or Why it called as Option Chain

  • निफ़्टी या कोई स्टॉक में बहुत सारी strike prices होती है , ( listing of all option contracts ) जिसे हम ऑप्शन में ट्रेड करते है , आप अगर देखोगे तो यह एक चैन की तरह होता है , और यह अपने underlying asset मतलब निफ़्टी की स्पॉट वैल्यू से जुड़े होते है इसलिए इसे ऑप्शन चैन कहते है |
  • और NSE हमे इन सारी strike prices का Open Interest , Volume बताता है , इसका उपयोग हम ट्रेडिंग के लिए करते है और इसेही Option Chain Analysis कहते है |
  • NSE द्वारा दिया जानेवाला ऑप्शन चैन डाटा आपको इस लिंक पर मिलेगा https://www.nseindia.com/option-chain

 

How to read Option Chart – ऑप्शन चैन चार्ट को कैसे पढ़े ?

 

OI- Open Interest – ओपन इंटरेस्ट 

  •  जैसे आप को पता है डेरीवेटिव मार्केट में कॉन्ट्रैक्ट पर ट्रेड होते है , निफ़्टी में यह कॉन्ट्रैक्ट 50 क्वांटिटी का होता है ,जितने ज्यादा ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट ख़रीदे जायेंगे उतना ओपन इंटरेस्ट बढ़ेगा
  • और वही कॉन्ट्रैक्ट जो ख़रीदे है वह बेचने पर वॉल्यूम बढ़ता है  | मतलब कोई भी स्ट्राइक प्राइस के कॉन्ट्रैक्ट ख़रीदे जाते है तो उसका ओपन इंटरेस्ट बढ़ता है |
  • यह एक पॉजिटिव सिग्नल होता है , ट्रेडिंग करते समय आपको ओपन इंटरेस्ट पर ध्यान देना बहुत जरुरी है |
  • ऑप्शन चैन के चार्ट पर आपको दो टाइप्स के ओपन इंटरेस्ट देखने मिलेंगे   CALL OI  and PUT OI 

ऑप्शन चैन का  चार्ट को कैसे पढ़े ?

ऑप्शन ट्रेडिंग में जैसे आपको पता है , एक ऑप्शन बायर होता है , और एक ऑप्शन सेलर होता है ,
ऑप्शन बाइंग के लिए कम मार्जिन की जरुरत होती है और ऑप्शन सेल्लिंग के लिए ज्यादा मार्जिन लगता है ,
जिसके पास बड़ा पैसा होता है या जिन्हे हम बड़े ट्रेडर कहते है जैसे , FII और DII ये हमेशा ऑप्शन बेचते है यानि ऑप्शन सेल् करते है |

अगर Call OI जिस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज्यादा है वह निफ़्टी का (रेसिस्टेन्स ) Resistance हुवा |
और जिस Put OI जिस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज्यादा है , वह निफ़्टी का सपोर्ट ( Support ) हुवा |

जैसे आपको बताया मार्केट के बड़े खिलाडी अधिकतम Option Selling करते है , आपको जो ओपन इंटरेस्ट दिखाई दे रहा है वह ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को सेल करने का है नाकी ऑप्शन बाय करने का यह अपने दिमाग में अच्छी तरह से फिट कर दे |

उदहारण के लिए

उदहारण के लिए
अगर निफ़्टी का स्पॉट प्राइस मतलब निफ़्टी अभी 17500 पर है और आपको

  • 17600 पर कॉल साइड में सबसे ज्यादा ओपन इंटरेस्ट दिखाई दे रहा है , तो निफ़्टी को 17600 पर रेसिस्टेन्स आएगा मतलब निफ़्टी 17600 के निचे रहेगा ऐसा अनुमान लगता है | इसका मतलब कोई बड़ा बड़े Institusion को लग रहा है की मार्केट इस लेवल को पार नहीं करेगा , और अधिकतर समय वह सही होते है | अगर 17600 के बाद 17700 पर ओपन इन्टरेस्ट ज्यादा है तो मार्केट में 17600 और 17700 का रेजिस्टेंस झोन बनता है | जिसे सप्लाई  झोन भी कहा जाता है |

Nifty OI chart

चार्ट पर आप देख सकते है की सबसे ज्यादा 17500 पर कॉल ऑप्शन राइटिंग हुई है मतलब ये रेजिस्टेंस की तरह काम करेगा

 

 

  • और 17300 पर पुट साइड में सबसे ज्यादा ओपन इंटरेस्ट है , तो निफ़्टी को 17300 पर सपोर्ट ले सकता है मतलब निफ़्टी 17600 के उपर रहने का संभावना है | इसका मतलब कोई बड़ा बड़े Institusion को लग रहा है की मार्केट इस लेवल के निचे नहीं जायेगा,और अधिकतर समय वह सही होते है |
    अगर 17300 के बाद 17200 पर ओपन इन्टरेस्ट ज्यादा है तो मार्केट में 17200 और 17300 का सपोर्ट झोन बनता है , जिसे डिमांड झोन भी कहा जाता है

 

oPTION CHAIN ANALYSIS

 

Change  in  OI   – चेंज इन ओपन इंटरेस्ट – Open Interest में बदलाव 

 

Open Interest में बदलाव क्यू आता है – मार्केट में खरीदने वाले और बेचने वाले हमेशा कम ज्यादा होते रहते है , कभी खरीदने वाले बेचने वाले बन जाते है या बेचने वाले खरीदने वाले बनते है , कभी कभी खरीदने वाले अपना ट्रेड मुनाफा कमाने के लिए अपनी position Square off करते है |  इन्ही सब कारन के वजह से Open Interest में हमेशा बदलाव आते रहते है , इसेही Change in Open Interest कहते है |

Trading करते समय Open interest के साथ Open Interest में होनेवाले बदलाव को भी देखना बहुत जरुरी होता है

Bulish 

अगर Call Option में OI घट रहा है |
और Put Option में OI बढ़ रहा है |

Bearish 

और Put Option में OI घट रहा है |
अगर Call Option में OI बढ़ रहा है |

 

How to Book Profit with Change in OI  

अगर ऑप्शन चैन में 17700 पर कॉल ओपन इंटरेस्ट ज्यादा है , मतलब यह रेसिस्टेन्स है , अगर निफ़्टी 17700 के पास जब आता है , और 17700 के कॉल ऑप्शन का ओपन इंटरेस्ट घटने लगता है , और 17700 स्ट्राइक प्राइस का पुट ऑप्शन का ओपन इंटरेस्ट बढ़ने लगता है ,इसका मतलब रेजिस्टेंस वीक हो रहा है और मार्केट रेजिस्टेंस को तोड़कर और ऊपर जा सकता है |

अगर ऑप्शन चैन में 17400 पर पुट ऑप्शन इंटरेस्ट ज्यादा है , मतलब यह सपोर्ट है , अगर निफ़्टी 17400 के पास जब आता है , और 17400 के पुट ऑप्शन का ओपन इंटरेस्ट घटने लगता है , और 17400 स्ट्राइक प्राइस का कॉल ऑप्शन का ओपन इंटरेस्ट बढ़ने लगता है ,इसका मतलब सपोर्ट वीक हो रहा है और मार्केट सपोर्ट को तोड़कर औरनिचे जा सकता है |

 

What is the Put Call Ratio? Put/Call ratio (PCR) 

 

PCR ratio signal

 

पुट कॉल रेश्यो भी एक इंडिकेटर की तरह काम करता है , मार्केट की दिशा (Trend ) और दिशा में आनेवाले बदलाव का संकेत इससे मिल सकता है |

पुट कॉल रेश्यो भी एक इंडिकेटर की तरह काम करता है , मार्केट की दिशा (Trend ) और दिशा में आनेवाले बदलाव का संकेत इससे मिल सकता है |

  • PCR अगर ज्यादा है इसका मतलब मार्किट bullish रहने के संकेत है , इसका मतलब पुट राइटिंग ( Put writing ) बढ़ रही है
  • PCR अगर कम है इसका मतलब मार्किट Bearish रहने के संकेत है , इसका मतलब कॉल राइटिंग ( Call writing ) बढ़ रही है
  • PCR से हमें मार्केट या निफ़्टी या स्टॉक का overall sentiment पता चलता है
  • अगर निफ़्टी स्पॉट के साथ साथ PCR ratio भी बढ़ रहा है तो यह तेजी का सिग्नल होता है |
  • अगर निफ़्टी अपने रेजिस्टेंस के पास है और PCR ratio कम हो रहा है तो यह बेयरिश सिग्नल होता है |

Max pain – मैक्स पेन क्या है ?

  • ज्यादातर ऑप्शन ट्रेडिंग पर ऑप्शन राइटर का ही कंट्रोल होता है , क्यू की बड़े institusion भी इसमें शामिल होते है
  • एक्सपायरी के ऐसी जगह होती है जहा कॉल और पुट राइटर को कम नुकसान होता है और उसी पॉइंट को मैक्स पेन कहते है |मैक्स
  • पेन ऐसी जगह होती है जहा इंडेक्स या स्टॉक के एक्सपायर होने के ज्यादा सम्भावना होती है |

 

 

 

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