Derivative Market & Its Types  वायदा बाजार क्या है ?

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Chapter -1 

डेरीवेटिव मार्केट और उसके प्रकार फ्यूचर & ऑप्शन को हम विस्तार से देखेंगे यह पहला अध्याय है

Derivative (डेरीवेटिव) शेयर मार्किट का एक उत्पाद (Product) है

डेरिवेटिव्स (Derivatives) का  मतलब होता है कोई ऐसी चीज जो किसी अन्य चीज से आई हो (derive हुई हो). Derivatives जिस दुसरे चीज़ से बनता है उसे हम Underlying Asset / Underlying कहते है. हर डेरिवेटिव्स की कीमत उसके Underlying Asset पर निर्भर करती है.

– डेरीवेटिव मार्किट का निर्माण स्टॉक मार्केट की जोखिम को कम करने के लिए बनाया गया है | (Derivative Market is Made to minimise Risk in Capital Markt )

डेरीवेटिव को एक उदाहरण से समज़ते है

चीनी (sugar) और गन्ने (sugarcane) का.उदाहरण ले सकते है    चीनी गन्ने से बनता है.

अगर गन्ने का भाव बढ़ेगा  तो उसके साथ चीनी का भाव भी बढ़ेगा ठीक इसी तरह से अगर गन्ने का भाव घटेगा  तो उसके साथ चीनी का भाव भी घटेगा

यहाँ पर चीनी (sugar) को हम Derivatives कह सकते है और गन्ने (sugarcane) को हम Underlying Asset / Underlying कह सकते है.

ओवर द काउंटर डेरिवेटिव यह एक ओपन मार्केट है , यहाँ contract में हीसा लेने वाले सीधे एक दूसरे से व्यवहार करते है , व्यवहार की जिम्मेदारी दोनों पार्टीज की होती है|

– फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट और फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में एक बड़ी हद तक ऐक जैसे ही होते है , लेकिन Future Contract का व्यवहार Exchange के माध्यम से होता है और forward contract का व्यवहार एक्सचेंज के माध्यम से नहीं होता है|

Future Contract –फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट

        F&O           Future & Option 

LA futures contract  भविष्य में किसी चीज की कीमत बढ़ने वाली है या घटने वाली है इसका अंदाजा लगाके उसका व्यवहार वर्तमान में करके रखने को futures contract कहते है | स्टॉक मार्केट  में किसी स्टॉक या इंडेक्स ( Nifty / BankNifty ) की कीमत भविष्य में बढ सकती है या कम हो सकती है उसका अनुमान लगाके आप फ्यूचर कॉन्ट्रेक्ट खरीद और बेच सकते है उसके लिए आपको प्रीमियम देना पड़ता है जो उसके वास्तविक कीमत से कम होता है

फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट जैसे ही ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट डेरीवेटिव मार्केट का एक उत्पाद है |

ऑप्शन कॉन्ट्रक्ट को भी आप खरीद या बेच सकते है , इसमें आपको फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट से भी कम  पैसा लगते  है , इसलिए  ऑप्शन  ट्रेडिंग  सबसे ज्यादा लोकप्रिय है , क्यू की इसमें बहुत कम  पैसो में आप ट्रेडिंग कर सकते है |

ऑप्शन  कॉन्ट्रक्ट एक इन्शुरन्स पॉलिसी जैसा होता है , जो ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदता है उसे प्रीमियम देना पड़ता है और ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट बेचता है वह प्रीमियम लेता है |

ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट ख़रीदनेवालेको ऑप्शन होल्डर कहते है | और ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट बेचने वालेको ऑप्शन राइटर कहते है |

Types Of Option Contract – ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के प्रकार

कॉल ऑप्शन- Call Option

पुट ऑप्शन- Put Option

स्टॉक या इंडेक्स की कीमत भविष्य में बढ़ने वाली है तो आप फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरीद सकते है या फिर कॉल ऑप्शन खरीदकर भविष्य में स्टॉक को ख़रीदनेके अधिकार (राइट टू बाय) को प्राप्त कर सकते है |

स्टॉक या इंडेक्स की कीमत भविष्य में घटने वाली है तो आप फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट बेच सकते है या फिर पुट ऑप्शन खरीदकर भविष्य में स्टॉक को बेचने के अधिकार (राइट टू बाय) को प्राप्त कर सकते है |