October 20, 2022

Derivative Market Aasan Hai | Future and Option Contract Basic Knowlage India [2022]

Derivative Market Aasan Hai | Future and Option Basic Knowlage India [2022]

 

Basic Knowlage of Derivative Market & Future and Option Contract

 

 

 Derivative Market & Its Types – वायदा बाजार क्या है ?

 

  • दो या अधिक दलों (parties ) में कोई प्रोडक्ट की भविष्य की संभाव्य कीमत के सौदे ( Contract) को Derivative या वायदा कहा जाता है|
  • डेरीवेटिव मार्किट का निर्माण स्टॉक मार्केट की जोखिम को कम करने के लिए किया गया है |                                           (Derivative Market is Made to minimise Risk in Capital Market )
  • डेरीवेटिव  शेयरमार्केट का एक उत्पाद (Product) है ,शेयरमार्केट में ट्रेडिंग करने वालो को Derivative के बारे में जानकारी होना बहुत जरुरी है |
  • हमारे यहाँ सब्जी बेचने वाला या फिर किराना स्टोर या मेडिकल स्टोर वाले भी जो प्रोडक्ट्स बेचने के लिए लाते है ,वो भी माल बड़ी क्वांटिटी में उठाते है, भविष्य में उसे बेचने के लिए और मुनाफा कमाने के लिए,                                                                          वैसे ही यहाँ पर कॉन्ट्रैक्ट Digital Format (डिजिटल प्रारूप) में होते है , और उस कॉन्ट्रैक्ट को हम खरीदकर भविष्य में मुनाफा कमाने के लिए खरीद/बेच सकते है| उसे Future Contract  (फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट) कहते है|

 

डेरीवेटिव को एक उदाहरण से समज़ते है

अगर कोई किसान गेहु की फसल लगता है तो उसे उगने में दो या तीन महीने लगते है ,                                                                        लेकिन भविष्य में उसकी संभावित मूल्य में परिवर्तन होने के जोखिम से बचने के लिए गेहु बेचने की कीमत वह आज ही किसी व्यापारी के साथ तय कर सकता है ,
यहाँ खेती में भविष्य में उगने वाले गेंहू डेरीवेटिव है और इसके किये जाने वाले व्यवहार  फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट कहते है|

 

 

 Derivative Market Structre

 

 

 

                             forward contract and Future Contract difference and similarity                               फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट और फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट अंतर और समानता

 

  • Over The Counter Derivative (ओवर द काउंटर डेरिवेटिव) – ओवर द काउंटर डेरिवेटिव यह एक ओपन मार्केट है , यहाँ contract में हीसा लेने वाले सीधे एक दूसरे से व्यवहार करते है , व्यवहार की जिम्मेदारी दोनों पार्टीज की होती है|
  • फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट और फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में एक बड़ी हद तक ऐक जैसे ही होते है , लेकिन Future Contract का व्यवहार Exchange के माध्यम से होता है और forward contract का व्यवहार एक्सचेंज के माध्यम से नहीं होता है|
  • Future Contract का व्यवहार एक्सचेंज के माध्यम से होने के कारन विश्वसनीय होता है ,और लिक्विडिटी (तरलता) अधिक होती है |

 

Use of Future Contract –फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग 

स्टॉक मार्केट में हम शेयर्स को खरीद सकते है लेकिन अगर मार्केट में किसी भी कारन थोड़े समय के लिए मन्दी आती है|                         तो आपने ख़रीदा हुवा शेयर निचे आ सकता है लेकिन आपको लगता है की मंदी के बाद शेयर वापस ऊपर की तरफ जा सकता है , ऐसे स्थिती में हम फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को बेचकर जोखिम को नियंत्रित कर सकते है|

 

Future Contract Structure 

डेरीवेटिव मार्केट में स्टॉक या इंडेक्स के एक ही समय पर तीन फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरेदी /बिक्री के लिए उपलब्ध होते है | जैसी की अगर ये जैनुअरी (January) महीना चल रहा है तो

  • चालू माह का – जैनुअरी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट
  • अगले महीने का – फेब्रुअरी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट
  • उसके अगले महीने का – मार्च फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट

 

Future Contract Expiry

हर महीने के आखरी गुरूवार (Thursday) को एक्सपायरी (Expiry)होती है , उसके बाद अप्रैल फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरेदी /बिक्री के लिए उपलब्ध होते है और जैनुअरी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट का अवधि समाप्त होता है|

 

What is Basis ? 

बेसिस = फ्यूचर कॉन्ट्रेक्ट की कीमत – स्पॉट मार्केट की कीमत

  • स्टॉक की कीमत स्टॉक मार्केट में हो रहे खरेदी और ब्रिक्री पर निर्भर होती है |
  • स्टॉक का ट्रेडिंग जिस मार्केट में होता है उसे स्पॉट मार्केट (SPOT MARKET ) कहते है | स्पॉट मार्केट को कॅश मार्केट भी कहते है |
  • फ्यूचर कॉन्ट्रेक्ट के व्यवहार जिस मार्केट में होते है उसे फ्यूचर मार्केट या डेरीवेटिव मार्केट कहते है |
  • फ्यूचर कॉन्ट्रेक्ट में टाइम वैल्यू (TIME VALUE ) होने के कारन फ्यूचर कॉन्ट्रेक्ट की कीमत स्पॉट मार्केट के कीमत से ज्यादा होनी चाहिये लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता | ये सब डिमांड और सप्लाई पे निर्भर होता है | यहाँ स्पॉट मार्केट की कीमत और फ्यूचर कॉन्ट्रेक्ट की कीमत में जो अंतर तैयार हो जाता है उसे बेसिस कहते है |
  • बेसिस अगर पॉजिटिव होता है तो उसे प्रीमियम कहेंगे और ये बुलिशनेस का संकेत होता है |
  • अगर बेसिस नेगेटिव होता है तो उसे डिस्काउंट कहेंगे और ये बेयरिशनेस का संकेत होता है

 

 

What is Cost Of Carry – कॉस्ट ऑफ़ कैरी क्या है ?

  • फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को एक्सपायरी डेट होती है | इसके कारन उसकी वैल्यू स्पॉट मार्केट के प्राइस से ज्यादा होती है | इसको कॉस्ट ऑफ़ कैरी ( COST OF CARRY ) कहते है |

 

What Are the Benifits of Future Contract – फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के फायदे

  • फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को लॉन्ग या शार्ट कर सकते है और वह पोजीशन आप कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी तक रख सकते है |
  • फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड लेनेके लिए आपको पूरी कीमत देनेकी जरुरत नहीं होती है | आप केवल मार्जिन देके फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड कर सकते है |
  • आप शेयर्स की डिलीवरी नहीं लेते है इसकारण आपकी दलाली या फिर बाकि होनेवाले खर्चमे कटौती होती है |
  • आप कॅश मार्केट की पोजीशन को फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट सें हेज (HEDGE- नुकसान से बचाव) कर सकते है|

 

Basic Key terms to know in futures & Option Contract

 

लॉट साइज (LOT SIZE)
डेरीवेटिव मार्केट में एक शेयर का व्यवहार नहीं होता है , यहाँ उसी स्टॉक के अनेक शेयर को मिलकर एक कॉन्ट्रैक्ट बनता है और उस कॉन्ट्रैक्ट को मार्केट में ट्रेड किया जाता है | कॉन्ट्रैक्ट में शेयर्स की संख्या एक्सचेंज / SEBI नियम के अनुसार निर्धारित करता है | उसे लॉट साइज कहते है |
टिक साइज (TICK SIZE)
फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की खरीददारी या बिकवाली की कीमत में जो न्यूनतम फरक होना चाहिए , ये फरक ५ पैसा या उसके गुणक में होना चाहिए
अगर स्टॉक की कीमत २०० रुपये है तो खरीदते या बेचते वक्त आपको बोली या ORDER २००.०५, २००.१० या २००.१५ इस श्रेणी की में होनी चाहिए |
लॉन्ग पोजीशन (LONG POSITION)
भविष्यमे स्टॉक की कीमत बढ़ने वाली है तब उस स्टॉक को पहले ख़रीदा जाता है इस व्यवहार या ट्रेड को लॉन्ग पोजीशन (LONG POSITION) कहते है |
शॉर्ट पोजीशन (SHORT POSITION)
भविष्यमे स्टॉक की कीमत घटने वाली है तब उस स्टॉक को पहले बेचा जाता है इस व्यवहार या ट्रेड को शॉर्ट पोजीशन (SHORT POSITION) कहते है |

 

What is an Option Contract ?  ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट क्या है ?

 

Option Contract –ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट

  • फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट जैसे ही ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट डेरीवेटिव मार्केट का एक उत्पाद है | ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को भी ख़रीदा या बेचा जाता है |
  • ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदने पर ख़रीदनेवालेको भविष्यमे स्टॉक ख़रीदनेका अधिकार मिलता है इसे ही RIGHT TO BUY (राइट टू बाय)(खरीदने का अधिकार) कहते है | इसी तरह ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को बेचने पर बेचनेवालेको भविष्यमे स्टॉक बेचनेका अधिकार मिलता है इसे ही RIGHT TO SELL (राइट टू सेल ) बेचनेका अधिकार कहते है |
  • भविष्य की निश्चित कीमत पे राइट टू बाय या राइट टू सेल का अधिकार प्राप्त करनेके लिए ट्रेडर को कुछ भुगतान करना पड़ता है इसे ही प्रीमियम कहते है | और स्टॉक की भविष्य की निश्चित कीमत को स्ट्राइक प्राइस कहते है|
  • ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट ख़रीदनेवालेको ऑप्शन होल्डर कहते है | और ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट बेचने वालेको ऑप्शन राइटर कहते है |
  • जो ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदता है उसे प्रीमियम देना पड़ता है और ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट बेचता है वह प्रीमियम लेता है |

 

Option contract can be an Insurance for your stocks

अगर आपने SBI के स्टॉक ख़रीदे है , और कुछ न्यूज़ के वजह से आपको लगता है की थोड़े दिनों के लिए शेयर मार्केट निचे की तरफ जा सकता है , ऐसे समय आप अपने ख़रीदे हुवे स्टॉक का Insurance Option Contract से कर सकते है , मतलब SBI का Put Option खरीद सकते है ,
अगर आप सोचते है वैसे ही मार्केट निचे जाता है और आपके स्टॉक की प्राइस भी कम होती है , तो आपने ख़रीदे हुवे SBI Put Option Primium की प्राइस बढ़ेगी और आपको बहुत ही मामूली सा नुकसान हो सकता है या आप फायदे में भी आ सकते है | इसेही Portfolio hedging कहते है |

What are Types Of Option Contract – ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के प्रकार

कॉल ऑप्शन- Call Option

पुट ऑप्शन- Put Option

कॉल ऑप्शन – Call Option
टेक्निकल एनालिसिस से या आपकी ट्रेडिंग स्ट्रैटर्जी से आपको लगता है की स्टॉक या इंडेक्स की कीमत भविष्य में बढ़ने वाली है तो आप फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरीद सकते है या फिर कॉल ऑप्शन खरीदकर भविष्य में स्टॉक को ख़रीदनेके अधिकार (राइट टू बाय) को प्राप्त कर सकते है |

पुट ऑप्शन – Put Option
टेक्निकल एनालिसिस से या आपकी ट्रेडिंग स्ट्रैटर्जी से आपको लगता है की स्टॉक या इंडेक्स की कीमत भविष्य में घटने वाली है तो आप फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट बेच सकते है या फिर पुट ऑप्शन खरीदकर भविष्य में स्टॉक को बेचने के अधिकार (राइट टू बाय) को प्राप्त कर सकते है |

 

 

 

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